आशिकों की मोहब्बत सबब ए जूनुन होती है
आशिकों के अश्क की हरेक बँूद जिगर का खँू होती है
चाहे जितने जुल्मों सितम ढाते रहे कातिल जहाँ वाले
मोहब्बत में आशिकों की कुर्बानिया शबब ए जूनुन होती है
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