सदियों से
कदम दर कदम
आगे ही आगे
बढता ही जा रहा हूँ मैं
आँधियों और तुफानों से
टकराते हुये निऱबाध गति से
वक्त से कदम मिलाते हुये
बढता ही जा रहा हूँ मैं
बढता ही जा रहा हूँ मैं
नील गगन के तले
महकती फिजाओं में
लरजती कायनात
चहकती हवाओं के साथ
उत्तरोत्तर आगे ही आगे
किसी को परवाह है या नही
बिल्कुल अंजान
मगर नही तनिक हैरान
आगे ही आगे बढता ही जा रहा हूँ मैं
मेरे पथ का कोई अंत
मंजिल का कोई पता नही
जनम से आज तलक
आगे ही आगे बढता ही जा रहा हूँ मैं
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Monday, 11 April 2016
आगे ही आगे बढता ही जा रहा हूँ
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