Thursday, 7 April 2016

तेरी डगर तकते तकते जिन्दगी की शाम ढल गई


तेरी डगर तकते तकते जिन्दगी की शाम ढल गई न जाने कब मेहबूब की दीदार होगा नजरो को एतबार होगा बहुत शुकृिया आपका जो ख्याले दिले नादाँ आया एक भटके हुये राही ने डगर पाई मंजिल का पता पाया अमृत सागर परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है Please join amritsagar Friends Follow the link below https://m.facebook.com/amritsagarownsms/

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव