aj machal rahi hai fiza
tera intazar hai
kal khwabgaah me machale the arama dil ke
jindagi ko gale lagane ke talabagar the
jindagi bahut khubsurat lagati hai
jis din se kiya tera didar hai
jindagi ki pahali khwaish hai tu
ab to dhadaklate dil ko
mere mahabub sirf tera intazar hai
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
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