जिन्दगी बनके मेरी जिन्दगी में आई वो
बहार बनके मेरी जिन्दगी में मुस्कुराई वो
आइने में खुद का दीदार करके छुई मुई सी लगाई वो
सामने आते ही नजरों ही नजरों में दिल में समाई वो
जिन्दगी का सबब बनके मन ही मन मुस्कुराई वो
शेफाली की मादक महक बनके फिजा में समाई वो
जन्नते हूर रूपसी बाला बनके धरा पे आई वो
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Monday, 16 May 2016
जिन्दगी बनके
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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