- ” मौन ” रहकर जो कहा जा सकता है वो ” शब्दों ” से नहीं और जो ” दिल ” से दिया जा सकता है वो ” हाथों ” से नहीं
- लम्बी ज़ुबान और लम्बा धागा हमेशा उलझ ही जाते हैं … समस्या से निपटने के लिए धागे को लपेट कर और ज़ुबान को काबू में रखें।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Saturday, 28 May 2016
” मौन ” रहकर जो कहा जा सकता है वो ” शब्दों ” से नहीं और जो ” दिल ” से दिया जा सकता है वो ” हाथों ” से नहीं
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
-
कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
-
जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
-
रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
No comments:
Post a Comment