Saturday, 28 May 2016

” मौन ” रहकर जो कहा जा सकता है वो ” शब्दों ” से नहीं और जो ” दिल ” से दिया जा सकता है वो ” हाथों ” से नहीं

  • ” मौन ” रहकर जो कहा जा सकता है वो ” शब्दों ” से नहीं और जो ” दिल ” से दिया जा सकता है वो ” हाथों ” से नहीं
  • लम्बी ज़ुबान और लम्बा धागा हमेशा उलझ ही जाते हैं … समस्या से निपटने के लिए धागे को लपेट कर और ज़ुबान को काबू में रखें।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव