Saturday, 28 May 2016

बेटी को चांद जैसा मत बनाओ कि हर कोई घूर घूरकर देखे

  • बेटी को चांद जैसा मत बनाओ कि हर कोई घूर घूरकर देखे…. किंतु बेटी को सूरज जैसा बनाओ ताकि घूरने से पहले सबकी नज़रें झुकजाएं….

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव