लबों की मुस्कान ले गया परदेशी
दर्द मोहब्बत के दे गया परदेशी
शबनमी चाँदनी में मोतियों को चूमके
कली का मादक पराग भी ले गया परदेशी
नन्ही कली को समय से पहले फूल बनाकर
मोहब्बत के नाम सूई चूभो गया वो परदेशी
परदेशी की पृीत से अंजान नन्ही के जीवन में
काले घनियारे मेघों की मानिंद सुनामी में डुबों गया परदेशी
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