गर मोहब्बत करना गुनाह है
तो अपना गुनाह दिल से
स्वीकार करता हूँ
ता उमृ तुमसे मोहब्बत का इकारार करता हूँ
मोहब्बत इबादत है मै जानता मेरे सनम
इसलिये तुमसे प्यार मेरे यार करता हूँ
मै जानता नही मै सही करता हूँ या गलत
मगर जो भी करता हूँ इबादत समझ के मेरी सरकार करता हूँ
मोहब्बत दिली ख्वाहिश है मेरी एतराम दिल से यार करता हूँ
पागल नही नासमझ बुद्धु है मोहब्बत मेरी
प्यार ही प्यार मेरे सनम से यार करता हूँ
कोयल की सी सुरीली कुहुकती है सनम प्यार करता हूँ
शेफाली की महकती है फिजा इकरार करता हूँ
जन्नते हूर रम्भा से हँसी यार मेरी इकरार करता हूँ
बरखा पहली फुहार सी महकती है मोहब्बत मेरी ईकरार करता हूँ
आशियाना ए दिल में रहती है मोहब्बत मेरी प्यार उससे करता हूँ
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Friday, 24 June 2016
गर मोहब्बत करना गुनाह है
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