मै कवि बन गया देख कर कुदरती छवि तुम्हारी
आइना ए दिल में नजर आती है सूरत तुम्हारी
हरेक संय में दीदारे यार हर घडी होता है तुम्हारा
कायनात रब की महकती है सनम महक से तुम्हारी
सागर में कुमुदनी खिलती है तुम्हारी मुस्कान से
अम्बर मे खग चहकते है अंगडाई से तुम्हारी
जनन्ते हूर सी दिलकश दिल को लगती परी जैसे तुम
दिल में बस गई मन मोहिनी छवि तुम्हारी
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 21 June 2016
मै कवि
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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