Tuesday, 21 June 2016

मै कवि

मै कवि बन गया देख कर कुदरती छवि तुम्हारी
आइना ए दिल में नजर आती है सूरत तुम्हारी
हरेक संय में दीदारे यार हर घडी होता है तुम्हारा
कायनात रब की महकती है सनम महक से तुम्हारी
सागर में कुमुदनी खिलती है तुम्हारी मुस्कान से
अम्बर मे खग चहकते है अंगडाई से तुम्हारी
जनन्ते हूर सी दिलकश दिल को लगती परी जैसे तुम
दिल में बस गई मन मोहिनी छवि तुम्हारी

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव