Monday, 13 June 2016

अल्फाजों से

अल्फाज से मोहब्बत होती है बहुत प्सारी
दिली जजबात और तजुरबात निभाते यारी
अल्फाजो से बया होती है मोहब्बत दुनिया की
और बया होती अक्खी कायनात और फुलवारी
रब दी सौ आज तलक ना हमने देखी अल्फाजो से मोहब्बत और यारी
हम दिल दे चुके सनम आबाद रहे रब दी नायाब फुलवारी
अल्फाजो के स्वर्णिम रंगो मे रंगी आदमियत और फुलवारी
कभी ना भुला पायेगे अल्फाजो से अटूट मोहब्बत और यारी

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव