बहुत खुबसूरत और लाजवाब लिखती है आप
साधारण भाषा असाधारण सी पृतीत होती है
महकती है कविता अल्फाजों के नये जामे मे
बरखा की पहली फुहार की मानिंद तन मन भिगोती है
शेफाली की मादक महक की मानिंद तन मन महकाती है
चाँदनी के शबनमी मोतियों की सी सिंगार करती है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Wednesday, 29 June 2016
बहुत खुबसूरत और बहुत प्यारी तुम यार मोहब्बत हो हमारी, तुम जाँ हम छिडकते है जन्नते हूर से भी ज्यादा लगती हो प्यारी
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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