Friday, 17 June 2016

१०३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


अंजान डगर का पथिक मनोहर हरेक मोड़ पे पाता मादक हाला
हरेक गाँव हर शहर में मिलती रूपसी सुर बाला मेरी मधुशाला
शबशाम धूम सी मचती जन्नत का नज़ारा होता मेरी मधुशाला
डगर डगर हरेक मोड़ पे मिलती रूपसी बाला की अमृतसम हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव