अंजान डगर का पथिक मनोहर हरेक मोड़ पे पाता मादक हाला
हरेक गाँव हर शहर में मिलती रूपसी सुर बाला मेरी मधुशाला
शबशाम धूम सी मचती जन्नत का नज़ारा होता मेरी मधुशाला
डगर डगर हरेक मोड़ पे मिलती रूपसी बाला की अमृतसम हाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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