तेरी वफा ए मोहब्बत से वाकिफ हूँ यार में
वफा ए मोहब्बत का ता उमृ तलबगार हूँ में
जब तलक जिस्म में रूह बाँकी है सनम
मरते दम तेरे रूखसार के नूर से रौशन रहेंगी दुनिया हमारी
तुम यार हो मेरी मेरी मोहब्बत से बढके
आशियाना ए दिल में तडपते है हरेक पल
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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