तुम्हे सामने पाकर अल्फाजों का जलजला सा सनम आता है
कसम से मेरे यार लिखते लिखते तुम्हारी चाहत में दिल मचल जाता है
आज तुम क्या रूठे सारे अल्फाज सुनामी मे बह गये
जितने चहकते थे कृतक अँजान तुम्हारी मोहब्बत में रूआँसे रह गये
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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