Friday, 15 July 2016

मोहब्बत यार एसी होती है

पागल है जिद्दी है
तुझे तो आदत
दुसरों पर हुकुम चलाने की
अपनी बादशाहत चलाने की
तुझे कभी अपनी गलती
नजर नहीं आती
सोच
तू भी गलती करती है
यदि दौलत मे ताकत होती तो
मोहब्बत तेरी गुलाम होती
लेकिन तेरी दौलत में
वो ताकत नही
जो मोहब्बत को खरीद सके
तुझे गुमाँ है
अपनी दौलत का
अपनी शोहरत का
हा मुझे भी गुमाँ है
अपनी मोहब्बत का
अपनी इबादत का
अपने प्यार का
अपने एतबार का
न जाने कब तुझे
होगा अहसास
अपने गुरूर का
अपने शुरूर का
अपनी मदहोशी का
अपने घमंड का
न जाने वो दिन कब आयेगा
झुमेगा आसमाँ जमीं पे
मोहब्बत बेशुमार
बरसायेगा
वो दिन कभी तो आयेगा

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