Saturday, 16 July 2016

२२७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



तेरे अश्कों की सुनामी ने ताण्डव मेरी मधुशाला में मचाया
कृतक अंजान डगर जीवन में भूचाल आज फिर से है आया
जीवन धन सब अस्त व्यस्त हो गया तेरे अश्कों की सुनामी में
कृतक अंजान डगर मनोहर ने महाकाव्य मेरी मधुशाला बनाया 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव