Sunday, 17 July 2016

२२९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



 यम को यार बनाया मैंने साथ बैठ पिलाई अनुपम मादक हाला
मदहोश हुआ नशे झूम उठा यम मेरी अपनी आधुनिक मधुशाला
रूपसी बाला के मरमरी जिस्म ने आग में घी का काम कर डाला
हुआ दीवाना याम यारों पीके कमसिन बाला की सोमरस हाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव