पूनम की मादक चाँदनी
गजब दिल पे ढा रही
ख्वाहिशे ख्वाबगाह
हुस्न परी जन्नते हूर
चैनों अमन चुरा गई
हवा के झरोखे के साथ
नींद भी हवा हो गई
तुम्हारी आरजू में सनम
तनहाईयाँ भी खफा हो गई
इन्ता हुई इन्तजार की
मन में तेरी चाहत
जवाँ सनम हो गई
मोहब्बत की महक से
महकने लगी कायनात
आशियाना ए दिल
ठिकाना ए सनम
पलकों के शमियाने में
इन्तजार है तुम्हारा
मनोहर यादव
" अमृत सागर "
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