कलयुगी आदमी को देख हुआ गिरगिट भी हैरान
कितना तेजी से रंग बदलता ये आज का इन्सान
कभी हवा का रूख भाँपकर
कभी परिस्थियों के अनुशार
कभी मौसम के चलते रंग बदलता ये कलयुगी हैवान
गिरगिट रंग बदलते आदमियों को देख खुद भूल गया रंग बदलना
छोड कलयुगी आदमियों का साथ गिरगिट कर गया सहराओ मे पृस्थान
गिरगिट कर गया सहराओ मे पृस्थान
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Wednesday, 5 October 2016
गिरगिट
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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