Wednesday, 14 December 2016

bechen ruh hai ( बेचेन रूह है )




bechen ruh hai.... बेचेन रूह है
beqarar hai jism.... बेचेंन है जिस्म
tuhi yar bata.... तुहि यार बता
ijhhare mohabbat kaise karu..., इझहारे मोहब्बत कैसे करू
mumkin nahi kisi ki soch badalana..... मुमकिन नहीं हर किसी की सोच बदलना
tuhi bata mohabbat ka ijhhar kaise karu...., तुहि बता मोहब्बत का इझहार कैसे करू
dil ko yaki hai ek din maan jaoge.... दिल को यकिं है एक दिन मान जाओगें
ibadate husn yar kaise karu...., इबादतें हुस्न यार कैसे करू
chandani utar aai hai dharati par...., आज चाँदनी उतर आई है जमी पर
tuhi bata mohabbat ka ijhahar kaise karu..., तुही बता मोहब्बत का इजहार कैसे करू
jamana dushaman hai mohabbat ka...., यूं तो सदियों से ज़माना दुश्मन है मोहब्बत का
tuhi bata usase muqabala yar kaise karu.... तुही बता उससे मुलाक़ात यार कैसे करू

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव