Sunday, 4 December 2016

आज फिजां इतनी बोझल क्यूं है..

आज फिजां इतनी बोझल क्यूं है..

आज फिजां इतनी बोझल क्यूं है.. ख़्वाब निगाहों से ओझल क्यूं है.. मौत से मिलने की तलबगार है.. ज़िन्दगी इतनी बेकल क्यूं है.. सही गलत की परख नही है.. ख़्वाहिशें इतनी चंचल क्यूं है.. चेहरे मासूमियत से भरे हैं.. दिलों मे इतना हलाहल क्यूं है.. सूकून भी सूकून नही देता.. बेचैनी से भरा हरपल क्यूं है.. अहंकार से लबालब है हर शख्स.. फिर हालात इतने निर्बल क्यूं है.. जब आखिरी अंजाम मिट्टी का मिट्टी है.. फिर हर इंसान पत्थर दिल क्यूं है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव