Friday, 2 December 2016

जर्रे जर्रे मे चाँदनी का नूर है

जर्रे जर्रे मे चाँदनी का नूर है 

 

जर्रे जर्रे मे मेरी मोहब्बत का नूर है समाया
लहू के कतरे कतरे से महबूब का नाम आया
कायनात की हरेक शंय मे दीदारे यार किया
अपनी जान से भी ज्यादा मैने प्यार किया है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव