Tuesday, 13 December 2016

मोहब्बत की महक







.सहराओं में जिन्दगीं आबाद है तेरी महक से नित बरसती है मोहब्बत तेरी ऱहमों करम से वीरानाओं में भी खिलती है जिंदगी तेरी इनायत ! महफूज है जिन्दगी तेरी लीलाओं के फज्र से !


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव