ये समय है
परिवर्तनशील
वक्त का पहिया चलता है
चलता ही रहेगा
वक्त का दरिया प्यारे बहेगा
एक दिन एसा आयेगा
जब पुन:मिलन निश्चत है
उस वक्त
शेफाली की मादक महक से
महकेगी कायनातों फिजा
जन्नत सी चहकेगी धरा
जिस्म की रूह हो तुम
दिल का गुरूर हो तुम
तुम्हारी साँसो से महक रहा है दिल
हमारा मिलन
नियती है कायनात की
अँखिंयों में नमी
लबों पे मुस्कुराहट
यही है पृियतम
तुम्हारी चाहत
शेफाली सी महकेगी
एक बार फिर जिन्दगी हमारी
तुम्ही हो मोहब्बत
जिन्दगी से प्यारी
मनोहर यादव" अमृत सागर "
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