Thursday, 8 December 2016

समय

ये समय है
परिवर्तनशील
वक्त का पहिया चलता है
चलता ही रहेगा
वक्त का दरिया प्यारे बहेगा
एक दिन एसा आयेगा
जब पुन:मिलन निश्चत है
उस वक्त
शेफाली की मादक महक से
महकेगी कायनातों फिजा
जन्नत सी चहकेगी धरा
जिस्म की रूह हो तुम
दिल का गुरूर हो तुम
तुम्हारी साँसो से महक रहा है दिल
हमारा मिलन
नियती है कायनात की
अँखिंयों में नमी
लबों पे मुस्कुराहट
यही है पृियतम
तुम्हारी चाहत
शेफाली सी महकेगी
एक बार फिर जिन्दगी हमारी
तुम्ही हो मोहब्बत
जिन्दगी से प्यारी

मनोहर यादव" अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव