शबनमी सिन्गार
अमावस्या की स्याह रात
चाँदनी का दीदार
जैसे पतझड के मौसम मे
जैसे पतझड के मौसम मे
बसंतो बहार
जैसे चाँद से बरसती
जैसे चाँद से बरसती
मादक हाला बेशुमार
जैसे सुबहो की पहली किरण
जैसे रति धरा पे आई
जैसे सुबहो की पहली किरण
जैसे रति धरा पे आई
कर सोलह सिन्गार
लबो से टप टप टपकती हुई
लबो से टप टप टपकती हुई
अमृत की धार
चाँदनी धरा पे कर रही
चाँदनी धरा पे कर रही
शबनमी सिन्गार
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