Thursday, 15 December 2016

सहराओं में खिली कुमुदनी

रब की अजीमों करीम नेमत है मोहब्बत
रब की इनायत है रब का फरमान है
नूरे रूखसार बदलती है मोहब्बत
टप टप टप लबों से टपकती है मोहब्बत
दीनाना ए मयखाना बनाती है मोहब्बत
जिन्दगी को शबनमी जिन्दगी बनाती है मोहब्बत
आशिकी में नित नये गुल खिलाती है मोहब्बत
जिन्दगी में चार चाँद लगाती है मोहब्बत
दीवानगी में अनेकानेक रंग दिखाती है मोहब्बत
बिछडे हुये,आशिकों को मिलाती है मोहब्बत
मोहब्बत के रंगों में रंगी जिन्दगी हँसीन लगती है
कभी मीठी कभी थोडी नमकीन लगती है
मुस्कुराती हुई जिन्दगी कमसिन लगती है
रूठी हुई महबूबे मोहब्बत नमकीन लगती है
कभी सैलाभे अश्क लगती है मोहब्बत
कभी सहराओं में कुमुदनी सी महकती है मोहब्बत
मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव