रब की अजीमों करीम नेमत है मोहब्बत
रब की इनायत है रब का फरमान है
रब की इनायत है रब का फरमान है
नूरे रूखसार बदलती है मोहब्बत
टप टप टप लबों से टपकती है मोहब्बत
टप टप टप लबों से टपकती है मोहब्बत
दीनाना ए मयखाना बनाती है मोहब्बत
जिन्दगी को शबनमी जिन्दगी बनाती है मोहब्बत
जिन्दगी को शबनमी जिन्दगी बनाती है मोहब्बत
आशिकी में नित नये गुल खिलाती है मोहब्बत
जिन्दगी में चार चाँद लगाती है मोहब्बत
जिन्दगी में चार चाँद लगाती है मोहब्बत
दीवानगी में अनेकानेक रंग दिखाती है मोहब्बत
बिछडे हुये,आशिकों को मिलाती है मोहब्बत
बिछडे हुये,आशिकों को मिलाती है मोहब्बत
मोहब्बत के रंगों में रंगी जिन्दगी हँसीन लगती है
कभी मीठी कभी थोडी नमकीन लगती है
कभी मीठी कभी थोडी नमकीन लगती है
मुस्कुराती हुई जिन्दगी कमसिन लगती है
रूठी हुई महबूबे मोहब्बत नमकीन लगती है
रूठी हुई महबूबे मोहब्बत नमकीन लगती है
कभी सैलाभे अश्क लगती है मोहब्बत
कभी सहराओं में कुमुदनी सी महकती है मोहब्बत
कभी सहराओं में कुमुदनी सी महकती है मोहब्बत
मनोहर यादव " अमृत सागर "
No comments:
Post a Comment