Wednesday, 7 December 2016

बाबुल का आँगन

बाबुल का आँगन 
आज फिर सूना सा है
मोहब्बत की तडप में

दिल की धडकन डूबी सी है
जिस आँगन में मोहब्बत से
परवान हुई ममता बाबुल की
अँखिंयों के सैलाभे अश्क में
बाबुल का चौबारा भीगा है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव