Saturday, 15 April 2017

जिन्दगी

जिन्दगी तुम हमें जान से भी ज्यादा प्यारी हो
कसम तुम्हारी जिन्दगी तुम एतबार हमारी हो

आरजुए जिन्दगी हो तुम जिन्दगी पृियतम
तुम जिन्दगी की मादक महक केशर की क्यारी हो

जान हो तुम जहाँन हो जिन्दगी शबनमी महक
पूनम की चाँदनी की मोतियों की माला अति प्यारी हो

मन भावन हो तुम करते मनुहार तुम्हारी मनोहर
भारत की दिलों जान , मोहब्बत की महक न्यारी हो

जिन्दगी तेरे बिन सूना सूना ये जहाँ हैं जिन्दगी
जैसे बगैर पूनम की चाँदनी के ये आसमाँ है जिन्दगी

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Saturday, 1 April 2017

बासंती फिजा

चाँदनी रात में शायें गजब ढाने लगे हैं
पूनम की रात हमें वो नजर आने लगें हैं !

पानी पानी हम अपना मुकद्दर सजाने हैं
दिली उमंगों और ख्वाहिशों पर पानी फिराने लगे हैं !

मनोहर सरेशाम साजिशों में घिरे नजर आने लगे हैं
जिस डाल पर बैठे गालिब उसी पर कुल्हाडी चलाने लगे हैं

खुश्क शाखों पर खुबसूरत पत्ते नजर आने लगे हैं
मनोहर पतझड को बसंत जुबाँ चिढाने लगे हैं

महुओं की मादक महक दिल लुभाने लगी है
बासंती पवनों हरेक ओर रति नजर आने लगी है

पर्दे से बाहर पलाश की नन्हीं कली मुस्काने लगी है
अपनी खुबसूरती से वसुन्धरा पर गजब ढाने लगी है

बासंती फिजाओं में महबूबे मोहब्बत जिस्म पे छाने लगी है
सरोवर में कुमुदनी की तरूणाई आलम दिखाने लगी है

अब तो करो शंय में तूही तू यार नजर आने लगी है
महबूब की तरूणाई बसंत में जादू अपना चलाने लगी है !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव