Thursday, 29 November 2012

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तुम्हाते गुलाबी मनोरम लब कृती , मधुशाला के छलकते हुये पैमाने है
तुम्हारे कर मे सागर मय ,कुदरत के हसीन अफसाने है !!
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ईश्वर की नायाब कारीगरी हो तुम कुदरत का अनुपम उपहार हो

सागर मय से छ्लाकती हला ,मधुशाला का श्रांगार हो !!
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एक तेरे आ जाने से मधुशाला हुई प्रकाश प्ल्लावित

पैमानो से छ्लकाने लगी हाला ,प्यालो के टकाराने से गुंज उठी मधुशाला !!
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जिस रोज मै निकला डगर मधुशाला ,चहक रही थी मधुशाला

जामो के दौर पे दौर चल रहे थे ,मचल रही थी पैमानो मे हाला !!
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नही चाहिये मुझको शाकी तेरी ये मादक हाला

नही चाहिये मुझको शाकी तेरा मनभावन प्याला !!

ले जाओ अपनी हाला को तुम पास से मेरे

मै पथिक अंजान डगर का ,मै हू राही मतवाला !!

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव