मंगल को फतह करने की कवायत मे लग गया है
आज कलयुगी मानव बहुत बड गया है
क्योकि चांद पर वो फतह कर गया है
माउंट एवरेस्ट कि तो बात हि छोडो
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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