Wednesday, 12 December 2012


 

628

   तुम्हारे आने से रौशन है फिज़ा ,दीवानगी का आलम है ,

मदमस्त है चारो दिशाए ,बासंती पवन बहने लगी है उनचास !!


629

अंगारे से सुर्ख है लब तुम्हारे ,नैनों से छलक रही है हाला !

तुमसी पिलाने वाली सुरबाला ,मुझ सा पथिक हो पीने वाला !!

630

सांझ ढले गगन तले ,पक्षी अपने नीड़ चले 

कदम पथिक के आटोमेटिक ,उस ओर चले उस ओर बढे 

जहाँ मधु है मधुशाला है ,प्यालों से छलकती हाला है !

जहाँ राह निहारती सुरबाला है ,महफ़िल में सजा मय का प्याला है !!


631

संगीत मनोहर स्वर नुपुर तुम्हारे ,गीत मधुर सावन में प्यारे !

आँखों से छलकती हाला है , लब तुम्हारे सुर्ख अंगारे !!


632

प्रियतम तुम गाओ कोई गीत नया ,महफ़िल में क़यामत आ जाये !

बसंत में छा जाये काली घटा , और मधुशाला में हाला बरसाये !!

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव