Wednesday, 12 December 2012

623

 मधुशाला  में आज ख़ुशी का आलम है ,हो रही अमृत बरखा चहुओर है !

 घनघोर घटा छाई है , आज मधुशाला में मिलन ऋतू आई है !!

624

मधुशाला में बाह पसारे ,स्वागतातुर है बार बालाये आज रे !

साँसे उनकी ठहरी हुई है ,दिल में पथिक आने की है आस रे !!

625

आज पथिक के आने पर पर ही ,मेरी बुझेगी प्यास रे !

आज बरसेगी मेघो से हाला और भड़केगी प्यास रे !!

626

मैंने दिल से चाहा मधु को ,बड़े प्यार से अंग लगाया !

प्यार से भरकर दामन उसका ,मधु अपना रहबर बनाया !!

627

जिस दिन से आई है मयखाने सुरबाला ,तक़दीर बदल गई है मयखाने की !

अब तो रंगत चढ़ आई है फिजा में ,क्या बात कहू मै सुरबाला की 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव