Tuesday, 11 December 2012

सांझ ढल रही है रात मचल रही है , सुमधुर बयार चल रही है !

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सुरबलाए अल्हड सुन्दर अनुपम,लिए हर्ष अपार दिल  में में है !

सपने संजोये हजारों मन में ,ये हसीन बलायें मधुशाला का कौतुहल है !!

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मधुशाला में नित्य ही गूंजे ,स्वर मधुर संगीत मधुर ,ताल मधुर ,झंकार मधुर !

स्वर्ग की अलौकिक अप्सराओ के कर में ,शोभित है सागर मय है अपार !!

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स्वर गूंजे संगीत बने ,नभ में नित्य नव गीत बने ,आलौकिक संगीत बने !

संगीत की सरिता स्वर्ग से आई , मधुशाला में लेकर हर्ष अनुपम अपार !1

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सांझ ढल रही है रात मचल रही है , सुमधुर बयार चल रही है !

सुरबालाओ के कर में देखो ,सागर मय से हाला छलक रही है !


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव