Sunday, 16 December 2012

समझा था जिन्हें अपना मैंने ,बेगानों सा उन्होंने अहसास दिया !

011

उंगली पकडकर चलाना सिखाया साथ,उन्ही ने छोड़ दिया !

सीसे से भी नाजुक मेरे दिल को ,एक पल में मेरे अपनों ने तोड़ दिया !!

012

तनहाई के आलम में गैर समझकर छोड़ दिया !

प्यार किया था दिल से जिन्हें ,उसी  को  तन्हा छोड़ दिया !!

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जो रिश्ते बनाये थे ,दिल जिगर और जान से मैंने !

एक पल में उन्हें क्यों ,तोड़ दिया , क्यों मुझको तनहा छोड़ दिया !

014

कभी किये थे वादे कुछ मुझसे ,एक पल में सभी को तोड़ दिया !

अधिकार जो समझा था मैंने अपना ,,अधिकार मेरा कह छीन लिया !

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यादें जों दिल में बसी है अब तक ,जाने क्यों वापस आ जाती है !

तन्हाई के आलम में अक्सर दिल को मेरे तड़पती है !!

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दिल को मेरे तोड़ के तुमने ,उफनते सरोवर में छोड़ दिया !

तैर भी ना सका जब मै तो , सवयम को इश्वर के भरोसे छोड़ दिया !!

017

समझा था जिन्हें अपना मैंने ,बेगानों सा उन्होंने अहसास दिया !

दुत्कार दिया फटकार दिया ,सीने पे हथोड़े से वार किया !!

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ये भी ना समझा ये कृतक है ,मेरा अधिकार मेरा हक छीन लिया !

दिल को मेरे तोड़ दिया ,जीवन को मेरे गमगीन किया !!

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क्यों ऐसा तीर चलाया तुमने दिल को मेरे जो छेद गया !

क्यों अपना नहीं समझा तुमने और कलेजे पे वार किया !!

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वादे जो किये अब तक मैंने ,हर हाल में मैंने निभाएं है !

तुम्हीं ने अपना वादा तोडा ,अब जान पे मेरी बन आयी है !1

021

आसू बहाकर दो पल को ,तुम अपनी सत्यता उजागर कराती हो !

आंसू तुम्हारे दिल को मेरे छलनी छलनी कर देते है !!



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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव