011
उंगली पकडकर चलाना सिखाया साथ,उन्ही ने छोड़ दिया !
सीसे से भी नाजुक मेरे दिल को ,एक पल में मेरे अपनों ने तोड़ दिया !!
012
तनहाई के आलम में गैर समझकर छोड़ दिया !
प्यार किया था दिल से जिन्हें ,उसी को तन्हा छोड़ दिया !!
013
जो रिश्ते बनाये थे ,दिल जिगर और जान से मैंने !
एक पल में उन्हें क्यों ,तोड़ दिया , क्यों मुझको तनहा छोड़ दिया !
014
कभी किये थे वादे कुछ मुझसे ,एक पल में सभी को तोड़ दिया !
अधिकार जो समझा था मैंने अपना ,,अधिकार मेरा कह छीन लिया !
015
यादें जों दिल में बसी है अब तक ,जाने क्यों वापस आ जाती है !
तन्हाई के आलम में अक्सर दिल को मेरे तड़पती है !!
016
दिल को मेरे तोड़ के तुमने ,उफनते सरोवर में छोड़ दिया !
तैर भी ना सका जब मै तो , सवयम को इश्वर के भरोसे छोड़ दिया !!
017
समझा था जिन्हें अपना मैंने ,बेगानों सा उन्होंने अहसास दिया !
दुत्कार दिया फटकार दिया ,सीने पे हथोड़े से वार किया !!
018
ये भी ना समझा ये कृतक है ,मेरा अधिकार मेरा हक छीन लिया !
दिल को मेरे तोड़ दिया ,जीवन को मेरे गमगीन किया !!
019
क्यों ऐसा तीर चलाया तुमने दिल को मेरे जो छेद गया !
क्यों अपना नहीं समझा तुमने और कलेजे पे वार किया !!
020
वादे जो किये अब तक मैंने ,हर हाल में मैंने निभाएं है !
तुम्हीं ने अपना वादा तोडा ,अब जान पे मेरी बन आयी है !1
021
आसू बहाकर दो पल को ,तुम अपनी सत्यता उजागर कराती हो !
आंसू तुम्हारे दिल को मेरे छलनी छलनी कर देते है !!
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