Sunday, 16 December 2012

कलयुग की मै आधुनिक कृति मनोरम कृतक मनोहर पथ आई हूँ ! कर में मधुर उपहार मनोरम ,मनोहर कृति मधुशाला -दो लाई हूँ !!

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कलयुग की मै आधुनिक कृति मनोरम कृतक मनोहर पथ आई हूँ !

कर में मधुर उपहार मनोरम ,मनोहर कृति मधुशाला -दो लाई हूँ !!

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जो भी पढ़ेगा ,और सुनेगा ,गुणगान करेगा आधुनिक मधुशाला -2 !

जब कभी याद मेरी आएगी दौड़ा आयेगा मधुशाला ,पायेगा मधुर हाला !!

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मधुशाला अनुपम कृति मनोहर ,सारे विश्व में अपना परचम लहराएगी !

मान बढेगा मधुशाला का , स्वरों में गाई जायेगी !!

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कृतक कृत यह कृति मनोरम , जिस जिस हाथ में जायेगी !

सारे जहां में बजेगा डंका ,यह कृति अमर हो जायेगी !1

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जो भी पढ़ेगा और सुनेगा ,गायेगा मधुरतम तान में !

अमर ख्याति वह पायेगा,हिन्द सहित सारे जहान में !!

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आधुनिक मधुशाला देखो तुम ,दिलों पे सभी के छाई है !

नेट और पुस्तकालयों की क्या बात बताऊ ,सबके दिलो में जगह बनाई है !!

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव