Tuesday, 4 December 2012

कान्हा ने गोवर्धन पर्वत को  
जब अपनी छ्न्ग्ल पे उठाया ,
सारे ब्राजवासियो को 
 इंद्र के प्रकोप से बचाया ,
इंद्र कि पूजा को बंद कराके ,
गाय के गोबर से 
 गोबर्धन बनाके
 गऊ माता  का मान बढाया ,
ऐसे ही अपने भक्तो की लाज बचाना ,
जैसे तुने द्रोपदी का चीर बढाया ,
सरे आम मुझे भी रुसवा होणे से बचाना ,
जैसे तुने मीरा के विष को अम्रित बनाया ,
वैसे ही मेरे दुश्मन को दोस्त बनाना ,
जैसे तुने नरासिहा का भात सजाया ,
वैसे वक्त पे आके मेरी लाज बचना ,

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव