Sunday, 26 April 2015

मेरी आधुनिक मधुशाला मा रोज ही आते ।अगणित परदेशी अंजान । meri aadhunik madhushaala me nity hai aate


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव