Wednesday, 7 December 2016

samvariya bahut satave sakhi

मोहे पनघट पे नंदलाल की याद सतावे सखी
याद सतावे बडा तडपावें सखी नींद न आवे 
नंदबाबा को लाडलों कान्हा यशोमति को दुलारों

देवकी वसुदेव को नन्हों साँवरा दिल को बहुत तडपाये

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव