टूटे हुये दिल पे शबनमी मोहब्बत की बरसात
ये बसंत के मौसम पूनम की मादक चाँदनी रात
मोहब्बत की मादक महक से महकती जिन्दगी
जब से महबूबे मोहब्बत का मिला साथ
जिन्दगी की हरेक आरजू हर पल मिले महबूब का प्यार
ज्यों अवनी और अम्बर मिलते महकती शबनमी बरसात
दिलों के मिलने से महकती है फिजा चहकती है कायनात
जब चाँदनी के शबनमी मोतियों की चादर पर महबूब से होती मुलाकात
मोहब्बत और बेवफाई का चोली दामन का सा नाता है
उन्हें गुस्सा आता है हमारी मोहब्बत पर,हमें उनके गुस्से पे प्यार आता है
मोहब्बत में वफा से कतई अंजान नही है हम
हैरान है वफा ए महबूब से तनिक भी परेशां नहीं है हम
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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