Wednesday, 7 December 2016

टूटे हुये दिल पे शबनमी मोहब्बत की बरसात



 टूटे हुये दिल पे शबनमी मोहब्बत की बरसात
ये बसंत के मौसम पूनम की मादक चाँदनी रात


मोहब्बत की मादक महक से महकती जिन्दगी
जब से महबूबे मोहब्बत का मिला साथ

जिन्दगी की हरेक आरजू हर पल मिले महबूब का प्यार
ज्यों अवनी और अम्बर मिलते महकती शबनमी बरसात

दिलों के मिलने से महकती है फिजा चहकती है कायनात
जब चाँदनी के शबनमी मोतियों की चादर पर महबूब से होती मुलाकात

मोहब्बत और बेवफाई का चोली दामन का सा नाता है
उन्हें गुस्सा आता है हमारी मोहब्बत पर,हमें उनके गुस्से पे प्यार आता है

मोहब्बत में वफा से कतई अंजान नही है हम
हैरान है वफा ए महबूब से तनिक भी परेशां नहीं है हम

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव