Wednesday, 7 December 2016

आशियाना ए दिल

अब भी आशियाना ए दिल आबाद है तुम्हारी हँसी यादों से !
ता कयामत तेरे इन्तजार में जिन्दगी गुजार देंगें हम ए सनम !
बचपन गुँजरा बीता यौवन तेरे ही शबनमी मादक ख्यालों में !

तनहाईयों में ख्वाबगाह सदा ही आबाद रही तुम्हारी मखमली यादों में !

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव