Monday, 29 June 2015

महंगाई तू कहाँ से आई तुझसे नाराज मै ही सारा जमाना है।तेरी यारी को अब मैंने पहचाना है।तेरा मेरा नाता सदियों पुराना है।

मै आपकी प्रियतमा महंगाई बडे दिनों के बाद आज ही वापिस आई
बरसों से अपने वतन मे मैंने अपनी धाक जमाने
मेरे नाम से सब घबराते कवि दुर्गेस चाचू और कवि विजय सोनी भाई
मैंने चतुर्वेदी जी की आँखों की और रातों की नींद उडाई
सबके जेबो पे पड गया जिस दिन से मै वापस आई
समाज मे सबकी प्रिय मै खुबसूरत सहेली महंगाई
नेता अभिनेता देखो किसी के माथे कभी आज तलक शिकन नही आई
मेरे नाम से मुल्क की 90% जनता मेरे यारो देखो थर्राई घबराई
सबके दिलों मैंने अच्छी धाक यारो जमाई
अटल मनमोहनसिंह से नमो तक की कुर्सी यारो मैने हिलाई
मुल्क की तरक्की की गति मैने पवन वेग से बढ़ाई
सभी के मुखारबिन्द से तारीफे सुन सुन मैंने ली अंगडाई
मै आपकी प्रेमिका महंगाई बहुत थक ग ई हू भाई।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव