आपकी गुत्थी कमसिन नजर आती है।
कभी जग को हँसती कभी रूलाती है
स्वभाव से बड़ी चंचल नजर आती है
जब कभी गाँठ फसती तब मोहब्बत से बुलाती है।
उलझी हुई गाँठ को सुलझाने मे अहम भूमिका निभाती है।
गाँठ के बगैर कोई गुत्थी सुलझने नही पाती है।
बगैर गाँठ के गुत्थी असहाय नजर आती है।
जितना सुलझाने की कोशिश करो गुत्थी उलझती चली जाती है।
गैर से देखने पे कभी सोनाक्षी कभी केटरीना नजर आती है।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 9 July 2015
आपकी गुत्थी कमसिन नजर आती है। कभी जग को हँसती कभी रूलाती है स्वभाव से बड़ी चंचल नजर आती है जब कभी गाँठ फसती तब मोहब्बत से बुलाती है। उलझी हुई गाँठ को सुलझाने मे अहम भूमिका निभाती है। गाँठ के बगैर कोई गुत्थी सुलझने नही पाती है। बगैर गाँठ के गुत्थी असहाय नजर आती है। जितना सुलझाने की कोशिश करो गुत्थी उलझती चली जाती है। गैर से देखने पे कभी सोनाक्षी कभी केटरीना नजर आती है।
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खामोशियो की सागिर्दगी
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