Tuesday, 7 July 2015

बेवफाई कभी

बेवफाई कभी दस्तुरे मोहब्बत नही हुआ करती ।
वफाई सबब ए मोहब्बत उल्फत मे फकत होती है।
महबुबे मोहब्बत की बेवफाई का चर्चा सरेआम है।
जिसकी ताकीद महबुबे मोहब्बत के हाथों मे जाम है।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव