Wednesday, 8 July 2015

ये कागज की किश्ती वो झेलम का पानी । ये जमी ए जन्नत वो पाकियो की कारस्तानी। जन्नत से भी खुबसूरत ये जमी काश्मीरी नुरानी। लहु से है सीची जमी केशर की जान की बाजी हमने लगानी। पाकिस्तानीयो को डगर ए जन्नत दिखानी। जमी दरोश उनको करके यारो भारत भूमि वापस है पानी । ये कागज की किश्ती वो झेलम का पानी,.,....,,,,

ये कागज की किश्ती वो झेलम का पानी ।
ये जमी ए जन्नत वो पाकियो की कारस्तानी।
जन्नत से भी खुबसूरत ये जमी काश्मीरी नुरानी।
लहु से है सीची जमी केशर की जान की बाजी हमने लगानी।
पाकिस्तानीयो को डगर ए जन्नत दिखानी।
जमी दरोश उनको करके यारो भारत भूमि वापस है पानी ।
ये कागज की किश्ती वो झेलम का पानी,.,....,,,,

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव