क्या मैंने सोचा था मोहब्बत तेरे बारे मे मैंने।
क्या अंजामे मोहब्बत मैंने पाया है
मोहब्बत ए महबुब से कोई शिकवा नही मुझको।
जो सभी ने पाया उसे सजदा कर खुशी से मैने अपनाया है।
ए मोहब्बत तेरे अंजाम को आँखों से देखा मैंने
फिर भी महबुबे मोहब्बत को जिन्दगी मैंने बनाया है
ए मोहब्बत
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Wednesday, 8 July 2015
क्या मैंने सोचा था मोहब्बत तेरे बारे मे मैंने। क्या अंजामे मोहब्बत मैंने पाया है मोहब्बत ए महबुब से कोई शिकवा नही मुझको। जो सभी ने पाया उसे सजदा कर खुशी से मैने अपनाया है। ए मोहब्बत तेरे अंजाम को आँखों से देखा मैंने फिर भी महबुबे मोहब्बत को जिन्दगी मैंने बनाया है ए मोहब्बत
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
-
कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
-
जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
No comments:
Post a Comment