मेरे महबुब ने अश्क बनाके अपनी आँखों मे बसाया ।
दुपटटे की सलवटो मे बसाके सीने से फकत लगाया ।
तेरे अश्क दिल पे वार फकत यार करते है।
कृतक अंजान डगर के दिल को तार तार करते है।
तेरी आँखों मे अश्क देखकर
मेरे यार कलेजा मुँह को आया
लख लख शुक्राणा उस रब दा।
जिसने महबुबा के दिल फकत हर्षाया।
गमो के बादलों का दमन हुआ।
महबुबे मोहब्बत का दामन खुशियों से हर्षाया।
महबुबे मोहब्बत के अश्को को देख
मेरे अल्फाजो ने नोटिस हड़ताल का भिजवाया।
अल्फाजो ने रूख यार दिल का किया
और शेरो शायरी पे प्रश्न चिन्ह लगाया ।
मेरी महबुबे मोहब्बत का अश्को का राज कृतक समझ आया ।
कृतक अंजान डगर को अपने दिल मे महबुबे मोहब्बत ने बसाया ।
आज तलक मेहबुबा को मेरी मोहब्बत का एतबार नही।
ये बात अलग है मेरी महबुबे मोहब्बत ही फकत मेरी यार है।
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