सरकारी दफ्तर का बाबु बहुत अब काम करता है।
दो चम्मच चीनी की चाय पीता केश लेता आराम करता है।
जिस रोझ दिल फकत सरकारी दफ्तर हो जायेगा।
दोनों आँखें सदा को बंद करके कृतक गुडबाय हो जायेगा।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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