Friday, 24 July 2015

दूर के ढोल

दूर के ढोल दिल लुभाते है।
पास आकर दिल को फकत तीर चुभाते है।

दूर रहकर वो बहुत याद आते है
पास आकर दिल के तारों को फकत झनझनाते है।
तेरी यादों मे नग्मात ए मोहब्बत दिल से गुनगुनाते है।
फकत जब सामने महबुब मोहब्बत को पाते अपना पता भी भूल जाते है।
तनहाईयो के आलम मे यादों के मानिन्द जो जजबात दिल मे आते है।
महबुबे मोहब्बत की दिल की धडकन को मोहब्बत से गुनगुनाते है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव