Wednesday, 22 July 2015

तुम मेरी मोहब्बत

तुम मेरी मोहब्बत
मै मोहब्बत तुम्हारी
मै तुम्हें जान से प्यारा
तुम जान हमारी
मेरी भी कुछ लाचारी
तेरी भी कुछ लाचारी
हम दोनों मे निःस्वार्थ निहित है
दुनिया हमारी
मै दिल जिगर जान तुम्हारी
तुम सब कुछ हमारी
तुमसे से जीवन है
तुमसे है दुनिया सारी
तनहाईयो का आलम
हँसी यादें तुम्हारी
जिन्दगी बन गई
मानो लाचारी
समाज बन बैठा
बड़ा ही व्याभीचारी
उसको दिमाग की बिमारी
आँखों की लाचारी
कानों की बिमारी
कोई लगता नही अपना
जिन्दगी बन गई एक हँसी सपना।
वो तकती रहती राह हमारी ।
यारो मोहब्बत है
ला ईलाज बिमारी
इससे सारी दुनिया है हारी
मोहब्बत की राह मे
आंशिक मर ��जाते
है
नाम अमर कर जाते है
नित नये आंशिक आते है
सजदा करते मजार पे शीशे झुकाते है
आशिर्वाद मे दुख दर्द और मोहब्बत पाते है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव